उपयोगी जानकारिया ( पेज न.3)
उपयोगी जानकारिया
21. चरण स्पर्श की परंपरा:- चरण स्पर्श की क्रिया में अंग संचालन की शारीरिक क्रियाएँ व्यक्ति के मन में उत्साह, उमंग, चैतन्यता का संचार करती है। यह अपने आप में एक लघु व्यायाम और यौगिक क्रिया भी है, जिससे मन का तनाव, आलस्य और मनो-मालिन्यता से मुक्ति भी मिलती है।
22. गुरु दीक्षा का महत्व:- गुरु-दीक्षा गुरु की असीम कृपा और शिष्य की असीम श्रद्धा के संगम से ही सुलभ होती है। गुरु गीता में लिखा है- जिस व्यक्ति के मुख में गुरु मंत्र है, उसके सभी कार्य सहज ही सिद्ध हो जाते है। गुरु-दीक्षा के कारण शिष्य सर्वकार्य सिद्धि का मन्त्र प्राप्त कर लेता है। गुरु-दीक्षा मुख से मन्त्र बोलकर, दृष्टि के द्वारा अंतर्मन को जगाकर और स्पर्श के द्वारा कुंडलिनी शक्ति को जागृत करके दी जाती है। मंत्र द्वारा बोलकर दी गयी गुरु-दीक्षा को मांत्रिक दीक्षा, दृष्टि से दी गयी दीक्षा को शांभवी दीक्षा और स्पर्श से दी गयी दीक्षा स्पर्श दीक्षा कहलाती है। गुरु-दीक्षा के बिना कोई भी सिद्धि प्राप्त करना सम्भव नहीं है। गुरु-दीक्षा एक विज्ञानसम्मत परिपाटी भी है।
23. ब्राह्मण को दक्षिणा:- ब्राह्मण के सम्बन्ध में मनुस्मृति में कहा गया है कि षट्कर्मों में पढ़ाना, यज्ञ कराना और विशुद्ध द्विजातियों से दान ग्रहण करना आदि तीन कर्म ब्रह्मणो के जीविकोपार्जन के साधन है। अथर्ववेद में कहा गया है कि जो मनुष्य देवताओ के निमित्त याचित गाय और द्रव्य ब्रह्मणो को नहीं देते, देवता उन्हें दंडित करते है।
24. राम नाम के जप का महत्व:- राम नाम की महिमा अपरम्पार है। यह अत्यंत विलक्षण, चमत्कारी और सभी पापो का नाश करने वाले है। पध्यपुराण में राम नाम की महिमा बताते हुए कहा गया है कि जिस प्राणी के कानो में 'राम' नाम अकस्मात भी पड जाता है, यह उसके पापो को उसी प्रकार जला देता है, जिस प्रकार अग्नि की चिंगारी रुई को जला डालती है। राम नाम का हर समय और हर कार्य करते हुए जप करने से मनुष्य को परमगति मितली है। स्कंदपुराण के नागरखंड में राम नाम के जप का महत्व दर्शाते हुए कहा गया है कि चलते-फिरते, उठते-बैठते और सोते-जागते किसी भी समय जो मनुष्य राम नाम का जप करता है, वह कृतकार्य हो जाता है और अंततः भगवान विष्णु का पार्षद बनता है।
25. नित्य अग्निहोत्र क्यों ? :- अथर्ववेद के अनुसार अग्निहोत्रीणे प्रणुदे सपत्नान अर्थात अग्निहोत्र करने से शत्रुओ का नाश होता है। यहाँ पर शत्रुओ के नाश से तात्पर्य रोग, शोक, क्लेश आदि सभी विकारो को नष्ट करने से है। ऐसा होने पर निश्चित तौर पर मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है। साथ ही घर का वातावरण शुद्ध और सात्विक होता है।
26. पूजा में दीप प्रज्वलन का महत्व:- सृष्टि में सूर्यदेव को जीवन-ऊर्जा का स्त्रोत माना गया है और पृथ्वी पर अग्निदेव को सूर्यदेव का परिवर्तित रूप कहा गया है। इसी कारण जीवन प्रदान करने वाली जीवन-ऊर्जा को केंद्रीभूत करने के लिए दीप में प्रज्ज्वलित होने वाली अग्नि के रूप में सूर्यदेव को देव-पूजन आदि में अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाता है। शारीरिक संरचना के पांच प्रमुख तत्वो में अग्नि का भी प्रमुख स्थान है। ऐसा कहा जाता है कि अग्निदेव की उपस्थिति में उन्हें साक्षी मानकर किये गए कार्यो में सफलता अवश्य मिलती है और प्रज्ज्वलित दीप में अग्निदेव वास करते है। इस प्रकार प्रभु की पूजा-अर्चना करते समय और अपनी भक्ति को सफल करने के लिए दीप प्रज्ज्वलित किये जाते है।
27. आचमन तीन बार ही क्यों ? :- आचमन से कंठशोषण दूर होकर कफ की निवृति होती है, जिससे श्वसन क्रिया व मंत्रोच्चारण में शुद्धता आती है। इसी कारण प्रत्येक धार्मिक कार्यो में तीन बार आचमन किया जाता है। इस तरह तिन वेद- ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद भी प्रसन्न होते है और मनोकामना पूर्ण करते है।
28. सूर्योपासना में अघर्य का महत्व:- स्कन्दपुराण के काशीखण्ड के अनुसार सूर्यदेव की आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही धन-धान्य, आयु, स्वास्थ्य, पुत्र, पशु, धन, विविध भोग और स्वर्ग आदि भी सहज ही प्राप्त हो जाते है। ऋग्वेद के अनुसार सूर्यदेव में पापो से मुक्ति, रोगो का नाश करने, आयु एवं सुखो में वृद्धि करने तथा दरिद्रता निवारण की अपार क्षमता है। इसी कारण ऋग्वेद में इनके संतुलन हेतु सूर्यदेव से प्रार्थना की गयी है। वेदो में ओजस्, तेजस और ब्र्ह्मवर्चस्व की प्राप्ति के लिए सूर्योपासना करने का विधान दिया गया है। अग्निपुराण के अनुसार गायत्री मन्त्र के द्वारा सूर्योपासना करने पर वे प्रसन्न होते है। और उपासक को मनोवांछित फल प्रदान करते है।
29. संपति की करे सुरक्षा:- सम्पति को अपहरण से सुरक्षित करने, रुका धन पाने, दिया ऋण प्राप्त करने के लिए कार्तवियार्जुन का पाठ करे। यह लाभप्रद रहता है। इसे शुभ दिन से शुरू करे और रोज पाठ करे, तो सम्पति की सुरक्षा और अपने धन को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
30. शुभ है फेंगशुई बांस:- दीर्घायु प्राप्ति के लिए फेंगशुई में बांस के पौधे को महत्वपूर्ण माना जाता है।बांस का पौधा लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है। यह अच्छे भाग्य का संकेत देता है और ऑफिस या घर पर लगाने से लाभ देता है। अनुकूल समय आने पर यह खूब बढ़ता है।
31. माला से मन शुद्धि:- माला फेरने का आश्य मंत्रो को श्रृंखलाबद्ध तरीके से निश्चित प्रक्रिया में फेरना है।माला से जप करते समय अनामिका का प्रयोग नहीं करे। यह मन शुद्धि करती है। जप करते समय पूर्वाभिमुख या उतराभिमुख, स्वच्छ आसन, वस्त्रो के साथ बैठे।
32. दोष करे दूर:- तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है। यह घर में लगाने, जल देने, दर्शन करने से मनुष्य वाणी, तन और मन के समस्त दोष दूर करता है। तुलसी का पौधा पर्यावरण को भी शुद्ध करने का काम करता है।
33. सर्वविघ्न नाशक गणपति:- मांगलिक कार्यो अथवा संकट के समय सुमुख, एकदंत, कपिल गजकर्ण, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन। इन बारह नामो का पाठ करने पर किसी भी प्रकार का विघ्न नहीं होता।
34. मनोकामना पूरी होगी:- व्यापार वृद्धि के लिए श्वेतार्क गणपति या पारदेश्वर गणपति की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इनकी विधिवत स्थापना से व्यापार में लाभ, नौकरी में उन्नति, रोजगार व विद्यार्थियो को पढ़ाई में लाभ होता है। नियमित पूजा से मनोकामना पूरी होती है।
35. शिक्षा में बाधा भगाओ:- गणपति को विद्या, बुद्धि, ज्ञान और लेखन कार्य का प्रदाता माना गया है।पढ़ाई में असफल होने पर गणेश जी के मंत्र ॐ हीं-ग्रीं-हीं या ॐ वक्रतुण्डाय हुं के 108 बार पाठ करने से प्रतियोगी को परीक्षाओ में सफलता मिलेगी, पढ़ाई में आ रही रूकावट दूर होगी।
36. कर्ज मुक्ति के लिए:- समस्त कर्ज मुक्ति के लिए भगवान श्री गणेश जी के 'ऋणहर्ता' गणेश स्त्रोत' का पाठ एक वर्ष तक प्रतिदिन एक बार एकाग्रचित होकर श्रद्धा और विश्वास के साथ करे। प्रतिदिन भगवान गणपति की पूजा कर इस मंत्र के जाप से धन की प्राप्ति होती है।
37. संतान बाधा निवारक पाठ:- जिन स्त्रियो के संतान होने में बाधा आ रही हो तो वह श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान गणपति की प्रतिदिन विधिपूर्वक पूजा कर 'गणेश अर्थत्वशीर्ष' का पाठ करे। इससे अवश्य लाभ होगा। पूजा में लड्डू का नैवेध अवश्य चढ़ाये।
38. गणपति की कृपा प्राप्ति:- गणपति की कृपा प्राप्ति के लिए प्रतिदिन स्नान आदि से शुद्ध होकर उनकी प्रतिमा के सन्मुख चन्दन-पुष्प, धूप, दीप, नैवेध आदि से पूजन करे। साथ ही इस दौरान ॐ गं गणपतये नमः मन्त्र का पांच, ग्यारह अथवा इक्कीस बार पाठ करे।
39. मिलेगा जीवनसाथी:- कभी-कभी कुंडली में बुध ग्रह नीच राशि में हो, शत्रु राशि में दो प्रतिकूल प्रभाव विवाह में बाधक हो तो जातको को प्रत्येक माह में पुण्य नक्षत्र में गणेशजी को दूध से अभिषेक कराना चाहिए। हर बुधवार को गणपति को दूर्वा, मूंग, सिंदूर और मूंग के लड्डू चढ़ाये।
40. मन्त्र से भगाए रोग:- ॐ गणायै पूर्णत्व सिद्धि देहि-देहि नमः। भगवति मृतसंजीवनि मम शांति कुरु कुरु स्वाहा।। - इस मंत्र का जाप करने से उपचार के पश्चात ठीक न होने वाली बीमारियो, असाध्य रोगो में लाभ मिलता है।
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